• April 21, 2024

करोड़ों रुपए की फ्री की रेवड़ी बांटने के मामले में प्राधिकरण के दफ्तर में एसआईटी का छापा। 

 करोड़ों रुपए की फ्री की रेवड़ी बांटने के मामले में प्राधिकरण के दफ्तर में एसआईटी का छापा। 

नोएडा

करोड़ों रुपए की फ्री की रेवड़ी बांटने के मामले में प्राधिकरण के दफ्तर में एसआईटी का छापा। 

रिपोर्ट :-  योगेश राणा

नोएडा: इस समय की बड़ी खबर, नोएडा विकास प्राधिकरण के दफ्तर में (SIT) विशेष जांच दल का छापा, इस छापे के बाद प्राधिकरण के अधिकारियों में मचा हड़कंप वहीं नोएडा विकास प्राधिकरण के उच्च अधिकारी भी अपने-अपने दफ्तरों में पहुंचे । आखिर क्या है पूरा मामला, यह पूरा मामला नोएडा के गेझा तिलपताबाद गांव से जुड़ा है जहां नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने मिली भगत कर भूमि अधिग्रहण करने के मामले में असंवैधानिक तरीके से 100 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का मुआवजा बांट दिया था। इसके विरोध में कुछ लोगों द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष वाद दायर किया गया था जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए यह पाया की भूमि अधिग्रहण करने में कानून का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है और इसी मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने बेहद अहम टिप्पणी की थी कि आखिर प्राधिकरण में किन अधिकारियों से जांच कराई जाए क्योंकि यहां की तो पूरी व्यवस्था ही भ्रष्ट हो चुकी है और इस कड़ी फटकार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल का (SIT) का गठन किया और तीन अधिकारियों का एक समूह बनाकर नोएडा विकास प्राधिकरण के दफ्तर में भेजा गया है वही एसआईटी के अधिकारियों द्वारा प्राधिकरण के अधिकारियों से तमाम जानकारियां जुटाना में लगे हुए हैं।

 

 

 

विशेष जांच दल में आखिर किन-किन अधिकारियों किया गया है सम्मिलित-?

 

 

 

प्रदेश सरकार ने इस मामले में जांच के लिए जो कमेटी बनाई है, उसमें उत्तर प्रदेश चेयरमैन बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के साथ मेरठ मंडल के कमिश्नर और मेरठ मंडल के एडीजी को शामिल किया गया है। प्राधिकरण में किसानों को अतिरिक्त मुआवजा वितरण करने में बड़ी अनिमियतता सामने आई। जिसमें विभिन्न प्रकरणों में साठगांठ करके समझौते के आधार पर अधिकारियों द्वारा करोड़ों रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान मुआवजे के रूप में किया गया। इसके लिए चार गांवों की जांच की गई। जिसमें अकेले गेझा तिलपताबाद के 15 प्रकरणों में करीब 100 करोड़ 16 लाख 81 हजार रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देकर प्राधिकरण को बड़े राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया।

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