• July 12, 2024

सरकारी स्कूल में बाल मजदूरी करने को मजबूर बच्चे,शिक्षा विभाग बेसुध

 सरकारी स्कूल में बाल मजदूरी करने को मजबूर बच्चे,शिक्षा विभाग बेसुध

नोएडा

*सरकारी स्कूल में बाल मजदूरी करने को मजबूर बच्चे,शिक्षा विभाग बेसुध*

रिपोर्ट :- योगेश राणा

नोएडा।उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों की साक्षरता स्थिति को सुधारने के लिए लगातार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है और सरकार का प्रयास है कि सरकारी विद्यालय को एक आदर्श विद्यालय के रूप में स्थापित किया जाए ताकि उत्तर प्रदेश की साक्षरता स्थिति में बड़ा सुधार हो सके।इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए एक नारा दिया गया था *पढ़ेगा इंडिया आगे बढ़ेगा इंडिया* और इस नारे को आपने अक्सर हर सरकारी विद्यालय पर लिखा देखा होगा मगर इसके विपरित नोएडा के एक सरकारी विद्यालय के विडियो सामने आया है जहां छोटे बच्चों से अध्यापक टेबल उठाने का काम करते दिखाई दे रहे जोकि वीडियो में भी स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है कि छोटे बच्चे टेबल को उठाकर एक कमरे से दूसरे कमरे में ले जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह विधालय नोएडा के सेक्टर 5 स्थित आदर्श प्राथमिक विद्यालय है जहां बच्चों को शिक्षा देने की वजह अध्यापक बच्चों से टेबल ढोने का काम कराते दिखाई दे रहे हैं‌। अब अगर हम यह कहे कि जब स्कूलों में बच्चों से ऐसा कार्य तो कैसा इंडिया आगे बढ़ेगा। यह कहने में कोई गुरेज नहीं है क्योंकि जब बच्चे शिक्षा ग्रहण करेंगे ही नहीं तो भारत विश्व गुरु कैसे बनेगा और इस लचर व्यवस्था के लिए सरकारी महकमे के अफसर भी उतने ही जिम्मेदार हैं जितने की शिक्षक और महकमे के बड़े अफसर अपने वाता कुलीन वातावरण से बाहर ही निकलने का नाम नहीं ले रहें ऐसे में कैसे मान लिया जाए कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना धरातल पर लागू होंगी और प्रदेश का हर बच्चा शिक्षित होगा।

 

 

*बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसर भूले अपनी जिम्मेदारी*

 

प्रदेश सरकार बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और इसके लिए स्वयं खुद मुख्यमंत्री भी अधिकारियों पर इस बात का जोर देते हुए कई बार देखे गए हैं कि अनेकों बार मुख्यमंत्री ने खुले मंच से अधिकारियों को वाता कुलीन कार्यालय छोड़ औचक निरीक्षण करना शुरू करने के लिए कहा है।मगर नोएडा की बीएसए ऐश्वर्या लक्ष्मी जी शायद इन आदेशों को भुला कर बैठी है और तो और जब उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनके द्वार ना तो फोन उठाया गया और ना ही खबर लिखे जाने तक उनका कोई रिटर्न कॉल आया अब आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि शिक्षा विभाग के बड़े अफसर कितनी जिम्मेदारी से अपना कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं और आम जनता की सुनवाई को

अमलीजामा पहना रहे होंगे।

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