• May 22, 2024

High court ordered to deduct Rs 10,000 from CEO’s salary

 High court ordered to deduct Rs 10,000 from CEO’s salary

सीईओ के वेतन से 10 हजार रुपये काटने का हाईकोर्ट ने दिया आदेश

धीरेन्द्र अवाना
नोएडा।एक बार फिर ग्रेटर नोएडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु महेश्वरी चर्चा में है।चर्चा का मुख्य कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों की अवलेहना करना बताया जा रहा है।एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सीईओ के वेतन से 10 हजार रुपये काटने का आदेश दिया है।जिसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में अफरा तफरी का माहौल है।मामला ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एमएमआर समूह की कंपनियों के स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ा बताया जा रहा है।

बता दे कि एमएमआर समूह की कंपनी देवसाई कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में एक याचिका दायर की थी। जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को विचार करने के लिए प्रकरण भेजा था।याची का कहना है कि उनके मामले में सीईओ ने सुनवाई नहीं की।जिसके बाद कंपनी की ओर से एक अवमानना याचिका दायर की गयी थी।अवमानना याचिका पर 20 दिसंबर 2022 को हाईकोर्ट में जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत में सुनवाई हुई।

प्राधिकरण की अधिवक्ता अंजली उपाध्याय को याची की ओर से अवमानना आवेदन सौंपा गया। प्राधिकरण की वकील ने इस मामले में अदालत से चार हफ्ते का वक्त मांगा था।अदालत ने प्राधिकरण की वकील को समय देते हुये मामले में सुनवाई करने के लिए 31 जनवरी की तारीख लगा दी।31 जनवरी को
सुनवाई के दौरान जस्टिस पीयूष अग्रवाल ने जवाब मांगा तो प्राधिकरण की वकील ने एक बार फिर अतिरिक्त समय की मांग की।वकील ने कहा कि सीईओ इस मामले में रिट डालना चाहती है।इसलिए कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने के लिए वक्त मांग रही हैं।आदेशों की अवहेलना करने के जुर्म में कोर्ट ने आदेश दिया कि विपक्षी की वकील 10,000 रुपये हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में जमा करेंगी। यह धनराशि विपक्षी के वेतन से काटा जाएगा।यह पैसा एक सप्ताह में जमा करवाना होगा।इस मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।अदालत ने आदेश दिया है कि उस दिन सुनवाई के समय 10,000 रुपये जमा करवाने की रशीद अदालत के सामने पेश की जाए।देखा जाये तो प्रधिकरण के विधि विभाग की बड़ी लापरवाही के कारण सीईओ को बार बार कोर्ट की सुननी पड़ रही है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट और जिला उपभोक्ता अदालत से सीईओ के खिलाफ कड़े आदेश जारी हो चुके हैं। जिनमें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी से जुड़े एक मामले में सीईओ के खिलाफ वारंट जारी कर दिया था।इसी तरह पिछले दिनों उपभोक्ता अदालत में भी वारंट जारी किया था और एक महीने की सजा सुनाई थी।

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